काम करने की चार अच्छी आदतेजो आपकी ,थकान,चिंता दूर रखे।four good habits of doing this work and remove your fatigue, anxiety)

 काम करने की चार अच्छी आदते को अपनाए और अपनी ,थकान,चिंता दूर रखे ( four good habits of doing this work and remove your fatigue, anxiety)

जाने कोनसी हैं वो आदते जिनसे आपको 100 % काम से थकान नहीं होगी ,थकान,चिंता दूर रखे।

काम करने की चार अच्छी आदते : आपका स्वागत है! यदि आप सकारात्मकता और सफलता की ओर अग्रसर होना चाहते हैं, तो “काम करने की चार अच्छी आदतें” आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती हैं। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इन आदतों को अपनाने से आप स्वयं को सुधारेंगे, आत्मविश्वास को मजबूत करेंगे और अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर रहेंगे। काम करने की चार अच्छी आदतों का पालन करना किसी व्यक्ति की उन्नति और सफलता का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। जब हम अपनी दैनिक जीवनशैली में इन आदतों को सम्पन्न करते हैं, तो हम अपने काम के क्षेत्र में सम्पूर्णता और माहिरत प्राप्त करते हैं। यहां मैंने आपके लिए एक शानदार परिचय तैयार किया है जो काम करने की चार अच्छी आदतों के बारे में बात करता है:

1-अपने डेस्क से उन सारे कागजातों को हटा दीजिए जो सामने पड़े काम से संबंधित नहीं है

अगर किसी की डेस्क पर विभिन्न मामलों के ढेर सारे कागजों का पुलिंदा पड़ा हो तो उसका काम आसान और ज्यादा सही हो जाएगा अगर वो अपनी डेस्क से सामने पड़े काम के अलावा सारे कागज हटा लें। मैं इसे अच्छी हाउसकीपिंग कहता हूँ और यह क्षमता की ओर पहला कदम है।“व्यवस्था स्वर्ग का पहला नियम है।”

व्यवस्था बिजनेस का भी पहला नियम होना चाहिए। पर क्या ऐसा है? नहीं, एक औसत डेस्क वैसे कागजों से भरा रहता है जिन्हें हफ्तों से नहीं देखा गया है। अनुत्तरित मेल और रिपोर्ट और मेमो से भरा हुआ डेस्क कन्फ्यूजन और चिंता पैदा करने के लिए काफी है। यह उससे भी बुरा हो सकता है। के लिए लाखों चीजें, पर करने के लिए वक्त नहीं बार-बार याद आने से सिर्फ आपको तनाव और थकान नहीं होती, बल्कि उच्च रक्त दबाव, दिल की बीमारी और पेट के अल्सर भी हो सकते हैं। दायित्व या भार का अहसाह, वैसी चीजों की खत्म न होने वाली फेहरिस्त जिन्हें किया जाना है।

लेकिन डेस्क को साफ रखने का साधारण-सा काम कैसे आपको उच्च तनाव से करना ही है की तकलीफ से और जरूर किए जाने वाले अंतहीन चीजों के सिलसिले से बचा सकता है? मशहूर मनोवैज्ञानिक डॉक्टर विलियम एल. सेडलर ने एक रोगी के बारे में बताया जिसने एक साधारण तरीके का इस्तेमाल करके अपने-आपको नर्वस ब्रेकडाउन से बचाया। यह आदमी एक बड़ी शिकागो फार्म में एग्जीक्यूटिव था जब वह डॉक्टर सेडलर के ऑफिस आया तब वह तनाव से भरा, नर्वस और चिंतित था। उसे पता था कि वह चक्कर में फंस रहा था पर वह काम नहीं छोड़ सकता था। उसे मदद की जरूरत थी।

चार्ल्स इवान्स ह्यूज, यूनाइटेड स्टेट्स के भूतपूर्व चीफ जस्टिस ने कहा- लोग काम के दबाव से नहीं मरते वो ऊर्जा की बरबादी और चिंता से मरते है। हां. अपनी ऊर्जा की बरबादी से और चिंता से क्योंकि वो कभी अपना काम पूरा नहीं कर पाते।

2-चीजों को उनकी प्रमुखता के हिसाब से करें

हेनरी एल. दोहीं, पूरे देश में फैले सिटीज सर्विस कंपनी के संस्थापक ने कहा कि वो कितनी भी सेलरी दे डालें, पर दो ऐसी क्षमताएं हैं जिन्हें पाना उन्हें नामुमकिन लगता है। वो दो अमूल्य क्षमताएं हैं-पहली, सोचने की क्षमता। दूसरी चीजों को उनकी प्रमुखता के हिसाब से करने की क्षमता। चार्ल्स लकमैन, एक ऐसा इंसान जिसने जीरो से शुरुआत की और बारह सालों में पेप्सूडेंट कंपनी का प्रेसिडेंट बन एक लाख की सैलरी मिलती थी और जिसने इसके अलावा दस लाख डॉलर बनाए उस इंसान ने अपनी सफलता का श्रेय उन्हीं दो चीजों को दिया जिन्हें हेनरी एल. दोही पाना नामुमकिन मानते थे चार्ल्स लकमैन ने कहा- “जहां तक मुझे है, मैं हमेशा सुबह पांच बजे उठता आया हूं क्योंकि इस समय में बाकी समय की तुलना में अच्छा सोच सकता हूं-मैं बेहतर सोच सकता हूं और अपने दिन। की योजना बना सकता हूँ, चीजों को उनकी प्रमुखता के हिसाब से संयोजित कर सकता हूँ।

फ्रैंक बेट्जर, अमेरिका के एक सबसे सफल इंश्योरेंस सेल्समैन, अपने दिन की योजना बनाने के लिए सुबह पांच बजे तक का इंतजार नहीं करते थे। वो पिछली रात में ही प्लान करते थे-अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करते थे- अगले दिन के लिए इश्योरेंस की मात्रा निर्धारित करते थे। अगर वो असफल हुए तो वो मात्रा अगले दिन जुड़ जाती थी और ऐसा ही होता जाता था। मैंने अपने लंबे अनुभव से जानता हूं कि इंसान हर बार प्रमुखता के हिसाब से चीजें नहीं कर पाता, लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि प्रमुखता के हिसाब से चीजों को करने का कोई भी प्लान बिना प्लान के चीजों को करने से लाख गुना बेहतर है।

अगर जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने प्रथम चीजों को प्रथम करने का नियम नहीं बनाया होता तो वो लेखक नहीं बन पाते और जिंदगी भर बैंक कैशियर रह जाते। उनका प्लान था कि नौ सालों तक रोज पाच पेज लिखना, भले ही उन्होंने उन नौ सालों में सिर्फ तीस डॉलर कमाए हर दिन एक पेनी के हिसाब से रॉबिन्सन कुलो ने भी इस बात की तालिका बनाई कि वे दिन के हर घंटे क्या करेंगे।

3 -जब कोई समस्या आए उसे उसी समय सुलझाएं

अगर आपके पास तथ्य हो तो निर्णय ले को टाले मत मेरे भूतपूर्व छात्रों में से एक, स्वर्गीय एच.पी. हॉवेल ने बताया कि जब दो युएस स्टील के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एक सदस्य थे, बोर्ड की मीटिंग अक्सर काफी लंबी हुआ करती थी काफी समस्याओं पर चर्चा होती थी. कुछ ही निर्णय लिए जाते थे। परिणाम बोर्ड के हर सदस्य को पढ़ने के लिए रिपोर्टों का बंडल ले जाना पड़ता था।

अंततः, मिस्टर हॉवेल ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को मनाया कि वो एक समय में एक ही समस्या पर चर्चा करें और निर्णय लें। चीजों को टालना बिलकुल बंद उस निर्णय के लिए अधिक जानकारी की जरूरत पड़ सकती थी यह कुछ करना या कुछ न करना हो सकता था। लेकिन किसी समस्या के बाद दूसरी समस्या तक जाने से पहले उस पर निर्णय लेना जरूरी था। मिस्टर हॉवेल न कहा कि परिणाम आश्चर्यजनक थे डॉकेट खाली हो गया कैलेंडर साफ हो गया। हर सदस्य के लिए रिपोर्ट का बंडल घर ले जाना जरूरी नहीं रह गया। अनसुलझी समस्याओं की चिंता खत्म हो गयी। ये एक ऐसा अच्छा नियम है जो यू.एस. स्टील के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ही नहीं, आपके और मेरे लिए भी काम करता है।

4-संयोजित करना, काम कराना और संचालित करना सीखें

कई बिजनेस के लोग समय से पहले यमलोक जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने कभी जिम्मेदारी से दूसरों से काम कराना नहीं सीखा और सबकुछ खुद करने पर जोर डाला। परिणाम-ढेर सारी सूचनाएं और अव्यवस्था उन्हें परेशान कर डालती है। वो हड़बड़ी, चिंता, परेशानी और तनाव से भरे रहते हैं वो सीख नहीं पाते कि जिम्मेदारियां कैसे दूसरों पर डालनी है। मैं अपने अनुभव से जानता हूं कि गलत इंसान पर जिम्मेदारियां सौंपने से भी दुर्घटना हो जाती है।

लेकिन दूसरों को जिम्मेदारियां देना भले ही कितना कठिन हो, एग्जीक्यूटिव को इन्हें करना सीखना चाहिए अगर उन्हें चिंता, तनाव और थकान से बचना है। वैसे एग्जीक्यूटिव जो बड़े बिजनेस बनाते हैं और चीजों को संयोजित करना काम कराना और संचालित करना नहीं सीखते, अक्सर पचास-साठ की उम्र में तनाव और चिंता के कारण दिल की बीमारी के शिकार हो जाते हैं। कोई उदाहरण चाहते हैं? अपने लोकल पेपर में मृत्यु की खबरें पढ़ लें।

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